TRAI new rules television become costly

अब टीवी देखना पड़ सकता है महंगा

गैजेट-टेक्नोलॉजी
  • TRAI ने चैनल्स की प्राइसिंग पॉलिसी में किये बदलाव
  • टीवी देखने वालों  की जेब पर बोझ बढ़ा
  • कुछ टीवी चैनल्स को होगा भारी नुक्सान

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने टीवी देखने वालों के लिए अपने नए नियमों का ऐलान कर दिया है. ये नियम 1 जनवरी 2019 से लागू होंगे. अभी तक ये बात साफ़ नहीं हो पायी है कि इससे टीवी देखने वालों की जेब पर बोझ बढ़ेगा या घटेगा? जो भी हो इन नियमों, नए पैकेज, और इनके कारणों को जान ही लेना चाहिए. तो आइये सबसे पहले जानते हैं क्या है इसके मुख्य नियम जो आपकी जेब पर सीधा-सीधा असर डालते हैं:

TRAI के इन नए नियमों के मुताबिक अब हर टीवी यूज़र को अब अपने चैनल खुद चुनने का अधिकार होगा. अब आपको कोई ऐसा पैकज नहीं चुनना पड़ेगा जिसमे अनचाहे चैनल्स शामिल हों. तो अब आप सिर्फ उन्हीं चैनल्स के लिए पैसे देंगे जो आप देखते हैं. इसके लिए तमाम चैनल्स ने अपने चैनल की प्राइसिंग पॉलिसी तय करनी शुरू कर दी है. हालाँकि अभी कुछ ही चैनल्स के पैकेज सामने आये हैं.

ये है ट्राई द्वारा जारी की गयी नियमों की सूची:

ट्राई ने किया नए नियमों को लेकर ट्वीट:

ट्राई ने अपने ट्वीट में टीवी देखने वालों के लिए नए नियमों को एक पैसे बचत कि बताया और चैनल्स के हिसाब से ही बिल देने की बात कही.

ये हैं नए नियमों के कारण:

BARC (Broadcast Audience Research Council of India ) ने एक सर्वे किया था. इस सर्वे के अनुसार भारत में 90% परिवार 50 से कम टीवी चैनल्स देखते हैं और सिर्फ 10% ही 50 से ज़्यादा चैनल्स देखते हैं. अगर कोई परिवार  व्यक्ति विशेष महज़ 50 ही चैनल्स देख पाटा है तो उसे 250 चैनल्स पैसे देना बड़ी ही अनुचित बात है. इसलिए अब आपको 250 चैनल्स के पैसे नहीं देने पड़ेंगे.

अब आपको नए पैकेज में 100 बेसिक चैनल्स  130+100(GST) के देने होंगे. अगर कोई भी सब्सक्राइबर 200 से ज़्यादा चैनल्स देखना चाहेगा तो उसे 20 रूपए प्रति 25 चैनल का भुगतान पड़ेगा.

इन चैनल्स को होगा घाटा

चैनल्स के रेट ज़रूर बढ़ जाएंगे लेकिन इसका मतलब कतई नहीं  कमाई भी जायेगी. इस नयी नीति से कई चैनल्स को घाटा उठाना पद सकता है. भारत एक युवा देश है और यहां युवा मूवीज़ और क्रिकेट देखना ज़्यादा पसंद करते हैं. इसके हिसाब से बच्चों के लिए देखे जाने वाले मनोरंजन चैनेल्स को अच्छा घाटा होगा. इतना ही नहीं, जिन न्यूज़ चैनल्स पर फेक न्यूज़ दिखाने का आरोप है लोग उन्हें पसंद न करते हुए दूसरे चैनल्स की तरफ रुख़ करेंगे. साथ ही ऐसे स्पोर्ट्स चैनल जो की हिंदी में नहीं हैं या वो खेल किसी अन्य चैनल पर भी आता है, को नुक्सान झेलना पड़ सकता है.

एक तरफ टीवी यूज़र को सिर्फ देखे जाने वाले चैनल्स के लिए ही पैसे देने पड़ेंगे पर अब इन्ही चैनल्स  ज़्यादा बढ़ा दिए जाएंगे, तो ये टीवी देखने वालों का बचाव ये या शोषण? अपनी राय हमें बताएं.

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