कैसे मनाया जाता है महापर्व छठ

कैसे मनाया जाता है महापर्व छठ, आईए बताते हैं

देश
  • आज पूरे भारत वर्ष में छट पर्व मनाया जा रहा है.
  • ये पर्व पूरे 4 दिनों तक चलेगा.
  • इस पर्व में उपवास रखा जाता है जो की 36 घंटो तक चलता है.

पूरे देश में छठ का महापर्व शुरू हो चुका है. छठ का पर्व बिहार और यूपी के कुछ इलाको के लोग मनाते हैं. यह पर्व 11 नवंबर से नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ जिसमें कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को व्रत करने वाले महिला-पुरुष स्नान करके नए वस्त्र धारण करते हैं.

कार्तिक शुक्ल पक्ष की खष्ठी को छठ पूजा की जाती है. बता दें कि यह पर्व 4 दिनो तक चलता है. जिसमें तमाम लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. सूर्य पूजा का यह महापर्व सूर्य को प्रसन्न करके संतान की मनोकामना और कुशलता के लिए मनाया जाता है.

छठ का व्रत करने वाले महिला और पुरुष प्रसाद ग्रहण
छठ का व्रत करने वाले महिला और पुरुष प्रसाद ग्रहण

छठ का व्रत करने वाले महिला और पुरुष प्रसाद ग्रहण करने के बाद निर्जला उपवास रखते हैं. यह उपवास 36 घंटो तक चलता है. नहाय-खाय के बाद होता है खरना. कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना बोलते हैं. पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रत करने वाले महिला-पुरुष भोजन करते हैं.

खरना के बाद अगले दिन प्रसाद बनाए जाते हैं. प्रसाद में ठेकुआ, चावल का बना लड्डू, केला, नारियल, गन्ना प्रमुख है. छठ का प्रसाद बनाते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है. ठेकुआ और चावल के लड्डू के लिए गेंहू और चावल को काफी नियम-निष्ठा से धोकर पिसवाया जाता है. अनाज सुखाते वक्त काफी ध्यान रखना पड़ता है कि कोई पक्षी इसे जूठा ना कर दे या फिर किसी के पांव इसपर नहीं पड़े. ये प्रसाद घर में ही बनते हैं. प्रसाद तथा फल से बाँस की टोकरी सजाई जाती है.

व्रत की आगे की प्रक्रिया में खरना के अगले दिन अस्ताचलगामी यानि डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाएगा और उसके बाद बुधवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य के साथ ही छठ महापर्व का समापन होगा. छठ पूजा के प्रसाद में गन्नाउ और केले का भी विशेष महत्व है. अर्घ्यक देते वक्तक पूजा की सामग्री में गन्नेठ का होना जरूरी है.

इस महापर्व का अंत व्रत के चौथे दिन उगते सूरज को अर्घ्य देने के बाद होता है. सप्तमी को प्रातः सूर्योदय के समय विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित करते हैं. जिसके बाद यह व्रत समापन होता है.

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