समीर अंजान ने आशिकी, साजन, कुछ कुछ होता है, धूम, रेस जैसे फिल्मों के गाने लिखे है

“तुम ज़िंदगी में गीतकार नहीं बन सकते” कहकर जिस लड़के की डायरी तीसरे माले से फेंक दी थी, आज उसके नाम सबसे ज्यादा गीत लिखने का रिकॉर्ड है

मनोरंजन

गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का नाम तो सुना ही होगा. ये अवॉर्ड उन लोगों को दिया जाता है. जिन्होंने कोई ऐसा काम किया हो जो किसी ने नहीं किया है. या उस काम को सबसे बेहतर किया हो. 17 फरवरी 2016 को ये अवॉर्ड हिंदी फिल्मों के गीतकार समीर को दिया गया था. उनको ये अवॉर्ड मिला था सबसे ज्यादा गीत लिखने के लिए. समीर ने 500 से भी ज्यादा फिल्मों में 4000 से भी अधिक गाने लिखे है.

समीर का जन्म 24 फरवरी 1958 को वाराणसी के नजदीक ओदार गाँव में हुआ था. पिता अंजान बॉलीवुड के मशहूर गीतकार थे. अंजान साहब नहीं चाहते थे कि उनका बेटा गीतकार बने. इसलिए समीर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में जॉब करने लगे. काम में मन लगा नहीं. मुश्किल से एक या दो दिन हुए थे समीर ने जॉब छोड़ दी. 1980 में समीर मुम्बई आये. मुम्बई वो अपने पिता की मर्ज़ी के खिलाफ आये थे. सो अपनी मंज़िल की तलाश में खुद ही निकल पड़े.

समीर के बाद सबसे ज्यादा गाने लिखने का रिकॉर्ड आनंद बक्षी के नाम था

संघर्ष के दिनों में रोज़ अलग अलग म्यूजिक डायरेक्टर के पास जाते और अपने लिखे गाने सुनाते. एक दिन जब वो एक म्यूजिक डायरेक्टर के पास अपने गानों की डायरी लेकर गए तो उस म्यूजिक डायरेक्टर ने समीर की डायरी तीसरे माले से नीचे फेंक दी. और कहा कि तुम ज़िन्दगी में गीतकार नहीं बन सकते. सीढ़ियों से नीचे उतरते वक़्त समीर की आँखों में आँसू थे. लेकिन तभी उन्होंने अपने पिता अंजान की लिखी वो लाइन याद आयी. जग अभी जीता नहीं है, मैं अभी हारा नहीं हूँ. फैसला होनें से पहले हार कैसे मान लूं. समीर की पहली हिट फिल्म थी. आमिर खान और माधुरी दीक्षित स्टारर दिल.

समीर को पहला फिल्मफेयर मिला था. आशिक़ी फ़िल्म के गाने “नज़र के सामने ज़िगर के पास” के लिए. उसके बाद समीर ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. और जिस दौर में आनंद बक्षी, मज़रूह सुल्तानपुरी, इंदीवर, गुलज़ार, जावेद अख्तर जैसे गीतकारों का बोलबाला था. उनके बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई. समीर ने आम बोलचाल की भाषा में गाने लिखें. जो लोगों की ज़ुबान से आज तक नहीं उतरे है. समीर ने 100 से भी ज्यादा म्यूजिक डायरेक्टरों के साथ काम कर चुके है.

जहाँ उन्होंने एक तरफ 90 के दशक में नदीम श्रवण, अनु मलिक, जतिन ललित, आनंद मिलिंद के साथ काम किया. वहीं अगली पीढ़ी के संगीतकारो हिमेश रेशमिया, प्रीतम, साज़िद वाजिद के साथ भी काम किया है. एक तरफ लोग उन्हें रोमांटिक गानें लिखने के लिए जानते है तो दूसरी और “उन्होंने चार बज गए लेकिन पार्टी अभी बाकी है” जैसे पार्टी सांग्स भी लिखे. जो यूथ के पार्टी एंथम बन गए.

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